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शिक्षा का लक्ष्य: बच्चों का सर्वांगीण विकास

August 17, 2018

भारत की आत्मा गाँव में बसती है। यह कथन गाँधी जी ने युही नही कहा था बल्कि गाँवो में जीवंत संस्कृति, सभ्यता,मूल्य, अपनापन आदि मानवीय गरिमा को उच्च करने वाले कारको को देखकर कहा था। परंतु जब तक ग्रामीण अंचलों में मूल्य परक शिक्षा की समुचित व्यवस्था न हो तब तक व्यक्ति समाज में अपनी गरिमामय उपस्थिति दर्ज कराने में असफल रहता है। कुछ ऐसे ही उद्देश्यों के साथ मालवीय स्टडी सर्कल शैक्षणिक और सामाजिक रूप से पिछड़े हुए बच्चों को स्वयंसेवा के आधार पर ग्राम भुवालपुर में अपनी सेवायें प्रदान कर रहा है। 

शिक्षा का लक्ष्य बच्चों का सर्वांगीण विकास करना है। अतएव सरकार द्वारा स्वीकृत राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 के आलोक में मालवीय स्टडी सर्कल ज्ञान को स्कूल के बाहर के जीवन से जोड़ने हेतु निम्न बिन्दुओ पर कार्य कर रहा है। 

 

वर्ग सभा:: कक्षा प्रारम्भ होने से पूर्व प्रतिदिन वर्ग सभा का आयोजन होता है जिसमे प्रार्थना , सुविचार, मूल्य परक कहानी एवं विभिन्न प्रकार के प्रश्नोत्तरी होता है। 

स्काउट और गाइड:: बच्चों के व्यवहारिक जीवन में नेतृत्व कौशल एवं समय प्रबंधन जैसे गुणों के विकास के लिए स्काउट और गाइड के एक -एक यूनिट का संचालन होता है। 

 

 

 

व्याख्यान माला:: पाठ्यक्रम से इतर विभिन्न समकालीन मुद्दों, सामाजिक एवं शैक्षणिक मुद्दों से बच्चों को परिचित कराने एवं संवेदनशीलता के विकास हेतु विषय से संबंधित विशेषज्ञ को आमंत्रित कर  प्रत्येक माह एक व्याख्यान का आयोजन किया जाता है। 

 

मासिक जाँच:: विषयगत ज्ञान की जाँच के लिए मासिक जाँच परीक्षा होता है।

 

 

 

शिक्षक-अभिभावक बैठक :: बच्चों के पृष्टपोषण(feedback) एवं घर पर उनके व्यवहार कुशलता के वास्तविक स्थिति से परिचित एवं उनके मूल्यांकन हेतु नियमित अंतराल पर बैठक का आयोजन किया जाता है। 

 

 

यो::स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है। बच्चों को शारिरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ रखने हेतु नियमित अंतराल पर योग एवं ध्यान सिखाकर इसके नियमित अभ्यास हेतु उन्हें प्रेरित किया जाता है।